
नए लेबर कोड 2025 ने भारत के श्रमिकों और नियोक्ताओं के लिए एक नया दौर शुरू कर दिया है।
खासकर 50% वेज रूल से 2026 में हर कर्मचारी की सैलरी स्ट्रक्चर, टैक्स देनदारी और रिटायरमेंट सेविंग्स पर गहरा असर पड़ेगा।
यह नियम बेसिक पे + डीयरनेस अलाउंस (DA) + रिटेनिंग अलाउंस को कुल CTC का कम से कम 50% करने को बाध्य करता है, जिससे PF, ग्रेच्युटी जैसे लाभ बढ़ेंगे लेकिन हाथ में आने वाला पैसा कम लग सकता है।
लेबर कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020 के तहत वेजेस की नई परिभाषा दी गई है। अगर बेसिक + DA कुल CTC का 50% से कम है, तो अतिरिक्त अलाउंस को जोड़कर इसे 50% बनाना जरूरी है।
उदाहरण के लिए, अगर आपकी CTC 10 लाख रुपये सालाना है, तो बेसिक सैलरी कम से कम 5 लाख होनी चाहिए।
पहले कंपनियां बेसिक को 30-40% रखती थीं और HRA, स्पेशल अलाउंस में बाकी डाल देतीं, जिससे PF जैसी डिडक्शंस कम होतीं।
अब 21 नवंबर 2025 से लागू इस नियम से कंपनियों को सैलरी ब्रेकअप रीस्ट्रक्चर करना पड़ेगा। इससे ओवरटाइम, लीव इनकैशमेंट सब 50% वेज बेस पर कैलकुलेट होंगे।
सरकार का कहना है कि इससे श्रमिकों की लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल सिक्योरिटी मजबूत होगी।
छोटी कंपनियां जहां पहले कम बेसिक से बचतीं थीं, अब ग्रेच्युटी और PF पर ज्यादा खर्च करेंगी। फिक्स्ड-टर्म एम्प्लॉयी को भी प्रो-राटा ग्रेच्युटी मिलेगी।
2026 के अप्रेजल साइकल में कंपनियां 8.5-9.5% हाइक देंगी, लेकिन लेबर कोड को फैक्टर करते हुए। मान लीजिए CTC 7 लाख की है।
पहले बेसिक 40% (2.8 लाख) था, टेक होम सालाना 6.52 लाख। अब 50% (3.5 लाख) बेसिक से PF कंट्रीब्यूशन बढ़ेगा – कर्मचारी और एम्प्लॉयर दोनों का 12% ज्यादा।
नतीजा? महीने में 1500 रुपये कम टेक होम, लेकिन PF में अतिरिक्त 18,000 रुपये सालाना।
15 लाख CTC वाले के लिए असर और बड़ा। बेसिक 7.5 लाख हो जाएगा, PF सीमा (2.5 लाख पर इंटरेस्ट टैक्सेबल) पार हो सकती है।
कंपनियां NPS में 14% तक कंट्रीब्यूट करेंगी, जो टैक्स-फ्री है लेकिन 7.5 लाख कैप के बाद टैक्स लगेगा। कुल मिलाकर CTC वही, लेकिन स्ट्रक्चर बदलेगा – कम अलाउंस, ज्यादा फिक्स्ड कंपोनेंट।
50% रूल से टैक्सेबल सैलरी बढ़ेगी क्योंकि HRA, LTA जैसे एग्जेम्प्शंस कम होंगे।
पुरानी रेजीम में डिडक्शंस घटेंगे, लेकिन NPS/PF से 80CCD डिडक्शन मिलेगा। नई टैक्स रेजीम चुनें तो स्टैंडर्ड डिडक्शन 75,000 लेकिन PF कैप वॉच करें।
CA सुनील सुराना कहते हैं, “केस-बाय-केस एनालिसिस जरूरी। हाई सैलरी वालों को NPS स्विच करना फायदेमंद।” लॉन्ग टर्म में टैक्स एफिशिएंसी
बढ़ेगी क्योंकि रिटायरमेंट कॉर्पस बड़ा बनेगा।
PF, ग्रेच्युटी, पेंशन सब 50% वेज पर। 5 साल सर्विस पर ग्रेच्युटी (15 दिन वेज x सर्विस ईयर) दोगुनी हो सकती। फिक्स्ड-टर्म वर्कर्स को भी लाभ।
रिटायरमेंट पर कॉर्पस कई गुना बढ़ेगा – आज 1500 कम टेक होम, कल पेंशन दोगुनी। गिग वर्कर्स को भी सोशल सिक्योरिटी मिलेगी।
2026 में फ्लोर वेज नेशनल लेवल पर सेट होगा, जेंडर इक्वालिटी बढ़ेगी। महिलाओं को नाइट शिफ्ट्स की सुविधा।
कुल 4 कोड्स (वेज, इंडस्ट्रियल रिलेशंस, सोशल सिक्योरिटी, ओक्यूपेशनल सेफ्टी) 29 पुराने लॉज को रिप्लेस करेंगे।
कर्मचारियों को सलाह: सैलरी स्लिप चेक करें, टैक्स रेजीम रिव्यू करें। एम्प्लॉयर्स अपडेटेड पेरोल सिस्टम अपनाएं। यह बदलाव तात्कालिक नुकसान लेकिन भविष्य की मजबूत नींव है।